क्या आपने हाथ की लकीरों को बदलते हुए देखा है और आप इन परिवर्तनों के बारे में जानना चाहते हैं? आइए इसे वैज्ञानिक तथा समुद्रिक नजरिए से समझें। हस्तरेखा (Palmistry) भारत और एशिया में प्राचीन काल से जानी‑पहचानी विद्या है। इसे संस्कृत में समुद्रिका शास्त्र के नाम से जाना जाता है और माना जाता है कि हमारे शरीर की बनावट एवं हथेली की रेखाएँ हमारे स्वभाव, स्वास्थ्य और भाग्य की झलक देती हैं।
पिछले कुछ दशकों में चीन, तिब्बत, फारस, मिस्र और ग्रीस के विद्वानों ने इसे ज्योतिष, स्वभाव‑विद्या और आयुर्विज्ञान से जोड़ा। मध्य युग में इसे इस्लामी चिकित्सकों ने हुमोरल थ्योरी के अंतर्गत रोग पहचानने के साधन के रूप में भी अपनाया। हालाँकि आधुनिक विज्ञान इस विद्या को अलौकिक मानता है और वैज्ञानिक प्रमाण की कमी बताता है, किंतु हाथ की रेखाओं में मौजूद संकेत स्वास्थ्य, स्वच्छता और दैनिक आदतों के बारे में कई सामान्य बातें अवश्य बताते हैं।
