हस्तरेखा विज्ञान एक प्राचीन और रहस्यमय विद्या है जो हजारों वर्षों से मानव जीवन के रहस्यों को उजागर करने में सहायक रही है। परंतु जब भी कोई ज्योतिषी या हस्तरेखा विशेषज्ञ किसी व्यक्ति का हाथ देखता है, तो एक सामान्य प्रश्न उठता है — कौन सा हाथ पढ़ा जाए — बायाँ या दायाँ?
यह प्रश्न जितना सरल लगता है, उत्तर उतना ही गहरा और विचारपूर्ण है। दोनों हाथों की रेखाओं में दिखाई देने वाले अंतर को हस्तरेखा की अलग-अलग परंपराएँ आत्मिक, मानसिक और कर्म संबंधी अर्थ देती हैं। इस लेख में हम प्राचीन भारतीय परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण दोनों के आधार पर इस विषय को विस्तार से समझेंगे।