हस्तरेखा विज्ञान में अब तक ऐसा कोई पूरी तरह निश्चित और वैज्ञानिक तरीका विकसित नहीं हुआ है, जिससे केवल हाथ देखकर किसी व्यक्ति की वर्तमान आयु बिल्कुल सटीक रूप से बताई जा सके। हथेली या उसकी रेखाओं पर कोई ऐसा एकल चिन्ह नहीं होता जो अन्य सभी संकेतों से अलग होकर सीधे उम्र को दर्शा दे। फिर भी, यदि हाथ के समग्र स्वरूप, रंग और विशेष रूप से त्वचा की बनावट का सूक्ष्म और सावधानीपूर्वक निरीक्षण किया जाए, तो व्यक्ति की आयु का अनुमान कुछ वर्षों के अंतर के भीतर लगाया जा सकता है। युवावस्था में त्वचा सामान्यतः ताज़ी, लचीली, साफ़ रंगत वाली और ऊर्जा से भरपूर प्रतीत होती है, जिससे कम उम्र के हाथ आसानी से पहचाने जा सकते हैं।
How to Calculate Age from Life Line?
जैसे-जैसे आयु बढ़ती है, त्वचा की ताजगी कम होती जाती है और उस पर एक प्रकार की रेशमी या चमकदार परत उभरने लगती है, साथ ही रंग भी धीरे-धीरे गहराने लगता है। कई बार भूरे धब्बे भी दिखाई देने लगते हैं, जो प्रायः पचास वर्ष की आयु के आसपास अधिक स्पष्ट होते हैं। युवाओं और वृद्धों के हाथों में अंतर पहचानना अपेक्षाकृत सरल होता है, किंतु 25 से 45 वर्ष की आयु के बीच सही अनुमान लगाना अधिक कठिन माना जाता है। फिर भी निरंतर अभ्यास से त्वचा की दृढ़ता, रंग और समग्र बनावट को समझकर इस आयु-सीमा में भी काफी हद तक सटीक अनुमान लगाया जा सकता है, जो हस्तरेखा में आयु ज्ञात करने (उम्र पता लगाना) की सबसे व्यावहारिक विधि मानी जाती है।
हस्तरेखा में आयु निर्धारण का वैज्ञानिक आधार (Age Calculation on Life Line)
रेखाओं पर आयु को सही और तार्किक ढंग से पढ़ने के लिए यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि औसत मानव आयु (Average Human Lifespan) वास्तव में कितनी होती है। जीवन-रेखा को सौ वर्ष या उससे अधिक तक फैलाकर आयु मापने की जो विधियाँ प्रचलित हैं, वे व्यवहारिक और यथार्थ नहीं मानी जातीं, क्योंकि बहुत ही कम लोग इतनी लंबी आयु तक जीवित रहते हैं।
इसके विपरीत, बीमा कंपनियों द्वारा उपयोग की जाने वाली आयु-प्रत्याशा तालिकाएँ बड़े पैमाने के आँकड़ों और दीर्घ अनुभव पर आधारित होती हैं, इसलिए उन्हें वास्तविकता के अधिक निकट और भरोसेमंद माना जाता है। इन्हीं आँकड़ों के आधार पर बीमा कंपनियाँ बड़े आर्थिक जोखिम उठाती हैं, जो इनके व्यावहारिक सत्यापन को दर्शाता है।
इन आयु-प्रत्याशा तालिकाओं के अनुसार औसत बीमायोग्य जीवन लगभग 65 वर्ष का माना जाता है। फिर भी हस्तरेखा में आयु ज्ञात करने (Age Calculation) के उद्देश्य से यह अधिक उपयुक्त होता है कि मानव जीवन की अधिकतम सामान्य सीमा को 70 वर्ष मान लिया जाए।
इसी आधार पर जीवन-रेखा की शुरुआत शून्य (जन्म) से की जाती है और उसका अंत 68-69 वर्ष पर माना जाता है। इन दोनों बिंदुओं के बीच की पूरी दूरी को गणितीय रूप से समान भागों में विभाजित किया जाता है, ताकि जीवन के प्रत्येक मध्यवर्ती वर्ष का सही और संतुलित संकेत प्राप्त किया जा सके।
हस्तरेखा विज्ञान में जीवन रेखा द्वारा उम्र पता लगाना (आयु ज्ञात करना)
हस्तरेखा विज्ञान में जीवन रेखा (Life Line) को आयु ज्ञात करने का सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। जीवन रेखा का आरंभ गुरु पर्वत (Jupiter Mount) के नीचे से होता है और इसका अंत कलाई की रेखाओं (Rascette) तक माना जाता है। इन दोनों बिंदुओं के बीच का संपूर्ण भाग व्यक्ति के जीवन के विभिन्न वर्षों का प्रतीक होता है।
आयु को आसानी और तेजी से पढ़ने के लिए जीवन रेखा को बीच से विभाजित किया जाता है और इस केंद्रीय बिंदु को लगभग 33–34 वर्ष की आयु माना जाता है, क्योंकि यह 68 वर्ष की औसत मानव आयु का लगभग आधा होता है।

इस केंद्रीय बिंदु के ऊपर जीवन रेखा को क्रमशः 5, 8, 13, 19, 25 और 30 वर्ष के आयु-खंडों में बाँटा जाता है, जबकि इसके बाद का भाग 44, 50, 58 और 66 वर्ष को दर्शाता है। यदि किसी घटना की तिथि को एक वर्ष तक की सटीकता से जानना हो, तो 5 से 66 वर्ष के बीच की पूरी जीवन रेखा को छोटे-छोटे समान भागों में विभाजित किया जाता है, जहाँ प्रत्येक भाग एक वर्ष का प्रतिनिधित्व करता है।
चूँकि केवल आँखों से इतनी सूक्ष्म दूरी का अनुमान लगाना कठिन होता है, इसलिए अभ्यास के दौरान रेखा को हल्के से चिन्हित करना अधिक उपयोगी माना जाता है।
निरंतर अभ्यास से व्यक्ति जीवन रेखा पर 5, 7, 12, 19, 25, 30, 35, 42, 50, 58 और 67 वर्ष के बिंदुओं को आसानी से पहचानना सीख सकता है। यदि कोई संकेत इन निश्चित आयु-बिंदुओं के बीच दिखाई दे, तो रेखा को वर्षों में विभाजित कर उसकी सही तिथि तक पहुँचा जा सकता है।
अनुमान लगाते समय यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि हाथ लंबा है या छोटा—लंबे हाथ में प्रत्येक 6-वर्षीय अंतराल अधिक फैला हुआ होगा, जबकि छोटे हाथ में ये अंतराल पास-पास होंगे। अनुभव से यह सिद्ध हुआ है कि यह विधि हस्तरेखा में आयु ज्ञात करने (Age Calculation) के लिए सबसे अधिक व्यावहारिक और सटीक मानी जाती है, बशर्ते अभ्यासकर्ता पर्याप्त सावधानी और विवेक से इसका उपयोग करे।
हृदय रेखा (Heart Line) और मस्तिष्क रेखा (Head Line) पर आयु निर्धारण
हस्तरेखा विज्ञान में हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा पर आयु पढ़ना विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है, क्योंकि इससे यह जाँचा जा सकता है कि इन रेखाओं पर दिखाई देने वाली घटनाएँ जीवन रेखा पर दर्शाई गई परिस्थितियों से मेल खाती हैं या नहीं। आयु ज्ञात करने (उम्र पता लगाने) के लिए इन दोनों रेखाओं पर भी वही मूल सिद्धांत लागू होते हैं जो जीवन रेखा पर अपनाए जाते हैं। हृदय और मस्तिष्क रेखाएँ सामान्यतः गुरु पर्वत (Jupiter Mount) के नीचे से प्रारंभ होकर हथेली के पार, बाहरी किनारे की ओर बढ़ती हैं।

चूँकि इन रेखाओं की दिशा और बनावट व्यक्ति-विशेष के अनुसार बदलती रहती है, इसलिए आयु मापने के लिए एक काल्पनिक माप-रेखा का सहारा लिया जाता है। यह रेखा गुरु पर्वत के मध्य से शुरू होकर हथेली के बाहरी किनारे (Percussion) तक मानी जाती है। इस काल्पनिक रेखा पर 5, 12, 19, 25, 31, 37, 42, 51, 59 और 67 वर्ष के बिंदु निर्धारित किए जाते हैं। हृदय या मस्तिष्क रेखा पर कोई भी चिन्ह या घटना जिस आयु-खंड के नीचे आती है, वही उस घटना की अनुमानित आयु मानी जाती है।
यदि किसी घटना की तिथि को अधिक सटीकता अर्थात एक वर्ष तक की सीमा में जानना हो, तो हृदय और मस्तिष्क रेखाओं को भी छोटे-छोटे वार्षिक खंडों में विभाजित किया जाता है, ठीक उसी प्रकार जैसे जीवन रेखा में किया जाता है। उचित अभ्यास और सावधानी के साथ अपनाई गई यह विधि अत्यंत विश्वसनीय और संतुलित परिणाम देती है और विभिन्न रेखाओं के संकेतों को आपस में मिलाकर समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भाग्य रेखा या शनि रेखा (Saturn Line) द्वारा आयु ज्ञात करना
हस्तरेखा विज्ञान में शनि रेखा (Saturn Line) पर आयु निर्धारण नीचे से ऊपर की दिशा में किया जाता है। कलाई की रेखाओं (Rascette) से लेकर मस्तिष्क रेखा तक का भाग सामान्यतः 0 से 33 वर्ष, मस्तिष्क रेखा से हृदय रेखा तक का भाग 33 से 47 वर्ष, और हृदय रेखा से शनि उंगली के आधार तक का भाग 47 से 70 वर्ष की आयु को दर्शाता है।
इन तीन मुख्य आयु-खंडों को ध्यान में रखने से जीवन के प्रमुख कालखंडों को जल्दी और स्पष्ट रूप से पहचाना जा सकता है। यदि किसी घटना की तिथि को एक वर्ष तक की सटीकता से जानना हो, तो शनि रेखा को भी उसी प्रकार छोटे-छोटे वार्षिक खंडों में विभाजित किया जाता है जैसे जीवन रेखा में किया जाता है।

कई बार मस्तिष्क रेखा और हृदय रेखा की दिशा सामान्य से भिन्न होने के कारण शनि रेखा का उनसे मिलने वाला बिंदु ऊपर या नीचे खिसक जाता है। ऐसी स्थिति में हथेली में बनने वाला चतुर्भुज (Quadrangle) असामान्य रूप से चौड़ा या संकरा हो सकता है। जब ऐसा हो, तो केवल इन दो रेखाओं के बीच की दूरी पर निर्भर रहना उचित नहीं होता। इसके बजाय, पूरी शनि रेखा की लंबाई को ध्यान में रखकर आयु का मापन करना चाहिए, जिससे Age Calculation या आयु ज्ञात करना अधिक संतुलित और सटीक रूप से किया जा सके।
सूर्य रेखा (Apollo Line) और बुध रेखा (Mercury Line) पर आयु निर्धारण
हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य रेखा (Apollo Line) पर आयु निर्धारण की प्रक्रिया शनि रेखा के समान ही होती है, अर्थात इसे भी नीचे से ऊपर की ओर पढ़ा जाता है और वही आयु-विभाजन नियम इस पर लागू किए जाते हैं।

इसी प्रकार बुध रेखा (Mercury Line) भी नीचे से ऊपर पढ़ी जाती है, किंतु यह रेखा अपेक्षाकृत छोटी होती है, इसलिए इस पर आयु के खंड एक-दूसरे के अधिक पास दिखाई देते हैं। मर्करी रेखा अर्थात बुध रेखा का जीवन रेखा से गहरा संबंध माना जाता है, विशेषकर स्वास्थ्य, व्यवसाय और जीवन की व्यावहारिक स्थितियों के संदर्भ में, इसलिए आयु ज्ञात करने के लिए इस रेखा पर आयु पढ़ना कई बार अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है।

हस्तरेखा में अभ्यास और अनुभव का महत्व (Importance of Practice in Palmistry)
हस्तरेखा विज्ञान में तिथियाँ और आयु पढ़ना (Age Calculation / Date Reading) सबसे अधिक अभ्यास और धैर्य की माँग करने वाला क्षेत्र माना जाता है। प्रारंभिक चरण में गलतियाँ होना स्वाभाविक है, लेकिन इसका कारण नियमों की कमी नहीं बल्कि अभ्यासकर्ता का अपरिपक्व निर्णय होता है। जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है, व्यक्ति अधिक सावधानी, संयम और गहराई से विश्लेषण करने लगता है, जिससे निष्कर्ष अधिक सटीक होते जाते हैं।
अक्सर देखा गया है कि शुरुआती लोग बहुत जल्दी परिणाम घोषित कर देते हैं, जबकि अनुभवी हस्तरेखाविद सोच-समझकर, सभी संकेतों को जोड़कर और समय लेकर पढ़ता है—यही अंतर उसकी विश्वसनीयता को बढ़ाता है।
कई बार नए अभ्यासकर्ताओं को निराशा इसलिए होती है क्योंकि वे घटनाओं को गलत रेखाओं या स्थानों पर खोजने लगते हैं। उदाहरण के लिए, बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी संकेतों को केवल जीवन रेखा (Life Line) पर देखने की आम प्रवृत्ति होती है, जबकि वास्तव में मस्तिष्क रेखा (Head Line), हृदय रेखा (Heart Line), बुध रेखा (Mercury Line) और हथेली के पर्वत (Mounts) भी स्वास्थ्य समस्याओं और उनकी आयु को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। जब अभ्यासकर्ता यह समझ लेता है कि हर घटना का संकेत केवल एक ही रेखा पर नहीं होता, तब हस्तरेखा में आयु ज्ञात करना और तिथियाँ पढ़ना कहीं अधिक संतुलित, वैज्ञानिक और विश्वसनीय बन जाता है।
हस्तरेखा में वर्तमान आयु का महत्व (Age Calculation in Palmistry Explained)
वर्तमान आयु (Present Age) का सही ज्ञान हस्तरेखा विज्ञान में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी के आधार पर यह समझा जाता है कि हाथ में दिखाई देने वाली कौन-सी घटनाएँ पहले घट चुकी हैं और जीवन-रेखा (Life Line) के जीवन-मानचित्र में व्यक्ति इस समय किस चरण पर है। जब तक आयु-निर्धारण में पर्याप्त अभ्यास और अनुभव न हो जाए, तब तक जातक से उसकी उम्र पूछकर उसे एक प्रारंभिक संदर्भ (Reference Point) के रूप में लेना व्यावहारिक होता है।
इसका अर्थ यह नहीं कि उस उत्तर पर पूरी तरह निर्भर रहा जाए, क्योंकि सभी व्यक्ति हमेशा पूर्ण सत्य नहीं बताते। फिर भी अधिकतर लोग अपनी वास्तविक आयु के क़रीब ही जानकारी देते हैं और हाथ के आकार, त्वचा, रंग व बनावट के आधार पर यह तय करना अभ्यासकर्ता के विवेक पर निर्भर करता है कि दी गई आयु कितनी विश्वसनीय है।
किस आयु में कौन-सी घटना घटित हुई, इसे पढ़ने की क्षमता पूरी तरह अभ्यासकर्ता की सूक्ष्म दृष्टि, अनुभव और निर्णय-शक्ति पर निर्भर करती है। कुछ दक्ष हस्तरेखाविद घटनाओं का समय एक वर्ष की सीमा में बता पाने में सक्षम होते हैं, हालांकि ऐसे लोग बहुत कम हैं। अधिकांश मामलों में दो, तीन या पाँच वर्षों के अंतर तक पहुँचना ही व्यावहारिक और यथार्थ माना जाता है।
केवल हस्तरेखा विज्ञान के नियमों के आधार पर किसी घटना का सटीक महीना या दिन बताना वैज्ञानिक रूप से संभव नहीं है। इसी प्रकार केवल हाथ देखकर किसी व्यक्ति का नाम, उसके नाम का पहला अक्षर या किसी मित्र-संबंधी का नाम जानने का दावा भी तथ्यात्मक नहीं माना जाता। इसलिए हस्तरेखा द्वारा आयु ज्ञात करना (Age Calculation) एक अनुमानात्मक कला है, जो अभ्यास और विवेक के साथ ही विश्वसनीय बनती है।
वैज्ञानिक हस्तरेखा विज्ञान की सच्चाई: भविष्य नहीं, जीवन की वास्तविक समझ
एक वैज्ञानिक हस्तरेखाविद केवल भविष्य की मनगढ़ंत या अत्यधिक सुखद बातें नहीं करता और न ही यह दावा करता है कि उसके जाने के बाद चमत्कारी घटनाएँ घटेंगी। ऐसे दावे करने वाले लोग इसलिए लोकप्रिय हो जाते हैं क्योंकि मानव स्वभाव में आशा और विश्वास की प्रवृत्ति होती है—हम सब एक अच्छे भविष्य की कल्पना पर सहज ही भरोसा करना चाहते हैं।
वास्तव में, एक कुशल और ईमानदार हस्तरेखाविद (Palmist) की पहचान यह होती है कि वह अतीत की घटनाओं, व्यक्ति के स्वभाव, स्वास्थ्य, मानसिक प्रवृत्तियों और जीवन की प्रमुख परिस्थितियों को सही ढंग से बता और समझा सके। यदि कोई हस्तरेखाविद इन बुनियादी पहलुओं में ही असफल हो, तो उसकी विद्या और दावों पर विश्वास करना उचित नहीं माना जाता।
हस्तरेखा विज्ञान में यह भी स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है कि रोज़मर्रा की छोटी घटनाएँ हाथ में अंकित नहीं होतीं। जीवन की सामान्य दिनचर्या—जैसे दैनिक कार्य, छोटे उतार-चढ़ाव या मामूली बदलाव—जीवन-मानचित्र (Life Map) का हिस्सा नहीं होते। इसलिए यदि कोई व्यक्ति दिन-प्रतिदिन की घटनाओं का विवरण देने का दावा करे, तो वह प्रायः लोगों को भ्रमित करने का प्रयास करता है।
हाथ में केवल महत्वपूर्ण और जीवन को प्रभावित करने वाली घटनाएँ ही दिखाई देती हैं, जैसे गंभीर बीमारी, जीवन की दिशा में बड़ा परिवर्तन, कठोर संघर्ष, अत्यंत सुखद अवसर या बड़े संकट। इसके अतिरिक्त वे लोग और परिस्थितियाँ भी रेखाओं में परिलक्षित होती हैं जिन्होंने व्यक्ति के मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव डाला हो और उसके जीवन की दिशा को निर्णायक रूप से बदल दिया हो।
Frequently Asked Questions (FAQs) – Hastrekha Age Calculation
Which line shows age? Can palmistry predict exact death date?
The Life Line is the primary indicator, supported by the Fate Line. No, palmistry indicates health trends and vitality, not specific death dates.
हस्तरेखा विज्ञान में आयु निर्धारण क्या होता है?
हस्तरेखा विज्ञान में आयु निर्धारण वह पद्धति है जिसके माध्यम से हथेली पर बनी रेखाओं और चिह्नों को देखकर व्यक्ति की संभावित आयु, जीवन की अवधि और जीवन की गति का अनुमान लगाया जाता है। इस विद्या में यह माना जाता है कि मनुष्य के जन्म के साथ ही उसकी हथेली पर जीवन से जुड़े संकेत अंकित होने शुरू हो जाते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका जीवन रेखा निभाती है, जो अंगूठे के पास से शुरू होकर कलाई की ओर जाती है। यदि यह रेखा स्पष्ट, निरंतर और गहरी हो तो उसे अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु का संकेत माना जाता है।
इसके अतिरिक्त कलाई के पास स्थित मणिबंध रेखाएँ भी आयु निर्धारण में सहायक मानी जाती हैं। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, प्रत्येक मणिबंध रेखा लगभग 20 से 25 वर्षों के जीवन काल को दर्शाती है। जब इन सभी संकेतों को एक साथ पढ़ा जाता है, तब हस्तरेखा विज्ञान में आयु से जुड़ा निष्कर्ष निकाला जाता है।
मणिबंध रेखाओं के आधार पर आयु का अनुमान कैसे लगाया जाता है?
हथेली की कलाई पर बनी क्षैतिज रेखाओं को मणिबंध रेखाएँ कहा जाता है और इन्हें हस्तरेखा विज्ञान में आयु निर्धारण का एक अहम आधार माना गया है। आमतौर पर ये रेखाएँ हथेली के निचले हिस्से में स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, प्रत्येक मणिबंध रेखा जीवन के एक निश्चित कालखंड को दर्शाती है।
यदि किसी व्यक्ति की हथेली में केवल एक मणिबंध रेखा हो, तो उसका जीवन काल लगभग 20–25 वर्ष माना जाता है। दो रेखाएँ 45–50 वर्ष, तीन रेखाएँ 70–75 वर्ष और चार या उससे अधिक रेखाएँ अत्यधिक दीर्घायु का संकेत देती हैं।
इसके साथ ही इन रेखाओं की गुणवत्ता भी देखी जाती है। साफ़, सीधी और बिना कटाव वाली मणिबंध रेखाएँ अच्छे स्वास्थ्य और स्थिर जीवन का संकेत देती हैं, जबकि टूटी या धुंधली रेखाएँ जीवन में स्वास्थ्य संबंधी उतार-चढ़ाव की ओर इशारा करती हैं।
क्या केवल जीवन रेखा देखकर किसी व्यक्ति की सही उम्र बताई जा सकती है?
यह एक आम प्रश्न है कि क्या जीवन रेखा से किसी व्यक्ति की वास्तविक उम्र या मृत्यु का समय जाना जा सकता है। हस्तरेखा विज्ञान में इसका उत्तर स्पष्ट रूप से नहीं माना जाता है। जीवन रेखा को आयु का सीधा मापक नहीं, बल्कि जीवन की ऊर्जा, सहनशक्ति और स्वास्थ्य की स्थिति का संकेतक माना गया है।
यदि जीवन रेखा लंबी, गहरी और बिना रुकावट के हो, तो व्यक्ति में शारीरिक और मानसिक शक्ति अच्छी मानी जाती है। वहीं यदि यह रेखा बीच-बीच में कटी हुई या कमजोर हो, तो यह जीवन में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का संकेत देती है।
हालाँकि, हस्तरेखा विज्ञान यह भी मानता है कि आयु निर्धारण हमेशा जीवन रेखा, मणिबंध रेखाओं और अन्य सहायक चिह्नों को मिलाकर किया जाना चाहिए। केवल एक रेखा के आधार पर सटीक उम्र बताना न तो व्यावहारिक है और न ही शास्त्रसम्मत।
आयु रेखा (जीवन रेखा) क्या होती है और इसके चिह्न क्या बताते हैं?
आयु रेखा, जिसे सामान्य रूप से जीवन रेखा कहा जाता है, हथेली की सबसे प्रमुख रेखाओं में से एक होती है। यह रेखा अंगूठे और तर्जनी के बीच से शुरू होकर हथेली के निचले हिस्से तक जाती है। हस्तरेखा विज्ञान में इसे जीवन शक्ति, स्वास्थ्य और जीवटता का प्रतीक माना गया है।
इस रेखा पर बने विभिन्न चिह्न अलग-अलग अर्थ रखते हैं। उदाहरण के लिए, यदि जीवन रेखा पर त्रिभुज का निर्माण हो तो इसे शुभ माना जाता है और यह व्यक्ति की दीर्घायु का संकेत देता है। वहीं द्वीप जैसी आकृति कमजोरी या बीमारी की ओर इशारा कर सकती है।
यदि जीवन रेखा बार-बार टूटती हुई दिखाई दे, तो यह जीवन में संघर्ष, थकावट या ऊर्जा की कमी को दर्शाती है। इन सभी चिह्नों को समग्र रूप से देखकर ही आयु निर्धारण का निष्कर्ष निकाला जाता है।
आयु निर्धारण में हथेली के कौन से पर्वत महत्वपूर्ण माने जाते हैं?
हस्तरेखा विज्ञान में केवल रेखाएँ ही नहीं, बल्कि हथेली के पर्वत भी आयु निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से शुक्र पर्वत और गुरु पर्वत को जीवन शक्ति और दीर्घायु से जोड़ा जाता है।
शुक्र पर्वत, जो अंगूठे के आधार पर स्थित होता है, शरीर की ऊर्जा, रोग प्रतिरोधक क्षमता और जीवन के प्रति उत्साह को दर्शाता है। यदि यह पर्वत उभरा हुआ और भरा हुआ हो, तो व्यक्ति को स्वस्थ और दीर्घायु माना जाता है।
गुरु पर्वत, जो तर्जनी के नीचे होता है, आत्मबल और नेतृत्व क्षमता से जुड़ा होता है। यदि गुरु पर्वत से कोई रेखा निकलकर जीवन रेखा के साथ संतुलन बनाए रखे, तो यह लंबे और संतुलित जीवन का संकेत माना जाता है। इन पर्वतों का अध्ययन आयु निर्धारण को और अधिक सटीक बनाता है।
